राजा द्रुपद अपनी पुत्री द्रोपदी का विवाह पांडव के साथ करने के लिए सहमत हो गए।

Dharma : द्रुपद ने धूमधाम से किया अपनी पुत्री का पांचों पांडवों के साथ विवाह और दी भेंट, देवर्षि नारद ने कौन सी रहस्य की बात बतायी

Dharma : भगवान वेदव्यास द्वारा दिव्य दृष्टि देकर राजा द्रुपद को उनकी प्रिय पुत्री द्रौपदी के दो पूर्व जन्मों को दिखाने के बाद वो पांचों पांडवों से अपने पुत्री का विवाह करने को सहमति हो गए तो व्यास जी ने कहा, आज ही विवाह के लिए शुभ मुहूर्त है क्योंकि आज चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में हैं इसलिए राजन तुम आज ही द्रौपदी का पाणिग्रहण करो। उनकी आज्ञा सुन राजा द्रुपद ने अपने पुत्र धृष्टघुम्न और अन्य लोगों को तुरंत ही विवाह की तैयारी करने का आदेश दिया। 

पांचों पांडवों के साथ संपन्न हुआ विवाह

द्रौपदी को नहला धुला कर स्वच्छ और नए वस्त्र तथा आभूषण पहनाए गए। समय होने पर द्रौपदी को विवाह मंडप में लाया गया। राज परिवार के ईष्ट मित्र, मंत्री, ब्राह्मण, परिजन आदि सब आनंद के साथ विवाह समारोह में शामिल होने आए और अपने अपने आसन पर विराजमान हो गए। इधर पांचों पांडवों ने भी स्नान आदि कर अच्छे वस्त्र धारण किए और सज-धज कर महाराज द्रुपद के महल के आंगन में पहुंचे। वेदी पर अग्नि प्रज्जवलित कर सभी भाइयों ने एक-एक कर द्रौपदी के साथ भांवरे लेकर पाणिग्रहण किया। राजा द्रुपद ने इस अवसर पर अपने सभी दामादों को बहुत से घोड़े हाथी, रत्न आभूषण और नकदी आदि दी। इस तरह पांडव अपार संपत्ति और स्त्री रत्न प्राप्त कर सुख पूर्वक राजा द्रुपद के पास ही रहने लगे। एक और विचित्र बात हुई कि देवर्षि नारद के कथनानुसार द्रौपदी प्रतिदिन कन्या भाव का प्राप्त हो जाया करती थी। 

द्रौपदी को कुन्ती ने दिया आशीर्वाद

राजा द्रुपद की रानियों ने कुन्ती के पास जाकर उनके पैरों में सिर रख कर प्रणाम किया। द्रौपदी ने भी अपनी सास के चरणों का स्पर्श कर हाथ जोड़ कर खड़ी हो गयी। तब कुन्ती ने अपनी शीलवान बहू को आशीर्वाद देते हुए कहा, जैसे इंद्राणी ने इंद्र, स्वाहा ने अग्नि, रोहिणी ने चन्द्रमा, दमयंती ने नल, अरुन्धती ने वशिष्ठ और लक्ष्मी ने भगवान नारायण के साथ प्रेम का नियम अपनाया है, उसी तरह तुम भी अपने पतियों का साथ निभाना। तुम आयुष्मती, वीर प्रसवनी, सौभाग्यवती और पतिव्रता होकर सुख भोगो। घर पर आए हुए अतिथियों, साधु, बड़े और बच्चों की आवभगत तथा पालन पोषण में जीवन व्यतीत करो। तुम अपने सम्राटों की पटरानी बनो। जगत में तुम्हें सारे सुख मिलें और तुम सौ वर्षों तक उनका उपभोग करो। भगवान श्री कृष्ण भी उनका विवाह हो जाने के बाद सुंदर भेंटे भेजीं। 

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