सप्तर्षियों ने तप में लीन पार्वती जी को कई तरह से समझाने का प्रयास किया कि वे शिव जी को वर के रूप में पाने का प्रयास छोड़ दें क्योंकि संसार में उनसे भी अच्छे वर मिल जाएंगे. उनकी इन बातों का पार्वती जी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और साफ कर दिया कि वह विवाह करेंगी तो सिर्फ शिव जी से ही. पार्वती जी ने उनके पैरों पर पड़ते हुए कहा कि अब आप लोग घर जाइए क्योंकि बहुत देर हो चुकी है. शिव जी के प्रति उनके मन में इतनी श्रद्धा और प्रेम देख कर मुनियों ने उन्हें जगत जननी कह कर संबोधित करते हुए कहा कि वह माया है और शिव जी भगवान हैं. इस तरह आप दोनों इस जगत के माता-पिता हैं. इतना कहते हुए मुनि उनके चरणों में सिर रख कर चल दिए.
