विदुर ने महाराज धृतराष्ट्र को दी द्रौपदी के साथ पांडवों के विवाह की सूचना।

Dharma : विदुर ने महाराज धृतराष्ट्र को दी द्रौपदी के साथ पांडवों के विवाह की सूचना, जानिए कैसा रहा रिएक्शन

Dharma : द्रौपदी का पांडवों के साथ विवाह होते ही राजाओं ने अपने गुप्तचरों को लगाया तो पता लग गया कि ब्राह्मण वेश धारी युवक जिसने पांचाल देश में लक्ष्यवेध किया था, वह और कोई नहीं श्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन थे और बाद में पांचों पांडवों के साथ द्रौपदी का विधि-विधान के साथ पाणिग्रहण हो चुका है। यह समाचार जानकर बहुत से राजा प्रसन्न हुए कि लाक्षागृह की आग में पांडव बच गए लेकिन इसे सुनकर दुर्योधन को बहुत दुख हुआ। 

दुर्योधन तुरंत ही हस्तिनापुर लौट चला

दुर्योधन तत्काल अपने साथी अश्वत्थामा, शकुनि, कर्ण आदि के साथ द्रुपद की राजधानी से अपने हस्तिनापुर को लौट चले। दुःशासन ने दुर्योधन से धीरे से कहा, भाई जी ! ऐसा लगता है कि भाग्य बहुत बलवान होता है और कोशिशों से कुछ नहीं होता। हस्तिनापुर पहुंचने पर वहां का समाचार सुनकर सबसे अधिक प्रसन्नता विदुर को हुई और वो उसी समय धृतराष्ट्र के पास जाकर बोले, महाराज ! धन्य हैं धन्य हैं कुरुवंशियों की वृद्धि हो रही है। धृतराष्ट्र ने भी कहा यह तो बहुत ही आनंद की बात है। धृतराष्ट्र समझे कि उनके पुत्र दुर्योधन को द्रौपदी मिल गयी है, उन्होंने तरह-तरह के गहने भेजते हुए कहा कि वर-वधु को तुरंत मेरे पास ले आओ। विदुर ने स्पष्ट किया कि महाराज द्रौपदी का विवाह पांडवों के साथ हुआ है और वो आनंद के साथ द्रुपद की राजधानी में निवास कर रहे हैं।

विदुर से धृतराष्ट्र ने कही ये बात

विदुर की बात सुनकर धृतराष्ट्र ने कहा, विदुर ! पांडवों को मैं अपने पुत्रों से भी बढ़ कर प्यार करता हूं। उनके जीवन से, विवाह से और द्रुपद जैसा समधी पाकर मैं और भी प्रसन्न हूं। द्रुपद के आश्रय से वे बहुत जल्दी अपनी उन्नति कर लेंगे। विदुर ने कहा, मैं चाहता हूं कि पूरे जीवन आपकी बुद्धि ऐसी ही बनी रहे।    

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