Dharma : लाक्षागृह से बचकर निकलने के बाद गंगा पार कर पांडव घने जंगल में चलते-चलते थक गए और माता कुन्ती ने पानी की मांग की तो भीम ने सभी लोगों को एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठा दिया खुद पास में एक सुंदर तालाब से पानी ले आए।
हिडिम्बासुर को मिली पांडवों की गंध
ऋषि वैशम्पायन ने राजा जनमेजय को उनके पूर्वज पांडवों के जीवन की कथा सुनाते हुए बताया कि उसी वन में एक शाल के पेड़ पर हिडिम्बासुर नाम का राक्षस बैठा था, जो नरभक्षी था। मनुष्यों की सुगंध उसकी नाक तक पहुंची तो उसने अपनी बहन हिडिम्बा से कहा तुम जाओ इन मनुष्यों को मारकर ले आओ ताकि मैं मनुष्यों को खाकर अपनी भूख शांत कर सकूं, मैं इन मनुष्यों का रक्त पीना चाहता हूं। भाई की आज्ञा मानते हुए हिडिम्बा उसी बरगद के पेड़ के निकट पहुंची तो देखा चार पुरुष और एक प्रौढ़ महिला निश्चिंत हो कर सो रही है तथा एक विशालकाय पुरुष जागकर उनकी रक्षा कर रहा है। भीम को देख कर हिडिम्बा उसके रंग और रूप पर मोहित हो गयी।
मारने गयी हिडिम्बा का मन भीम को देख बदला
शेर के समान भीमसेन को देख कर हिडिम्बा का मन बदल गया और वह उनके रूप रंग पर मोहित हो गयी। उसने मन ही मन निश्चय किया कि यह पुरुष तो उसका पति होने योग्य है इसलिए वह अपने भाई की आज्ञा नहीं मानेगी क्योंकि भाई के प्रेम से बढकर पति का प्रेम होता है। यदि इन्हें मार कर खाया जाए तो थोड़ी देर तक तो भाई-बहन दोनों तृप्त हो सकते हैं किंतु इनको जीवित रखकर मैं बहुत वर्षों तक सुख भोग सकती हूं। इस तरह के विचार आते ही राक्षसी हिडिम्बा ने सुंदर महिला का रूप धारण किया और भीमसेन की ओर बढ़ी। वह आकर्षक कपड़े और आभूषण पहन कर और भी सुंदर लगने लगी। पास पहुंच कर उसने उनका परिचय पूछा, हे पुरुष शिरोमणि, आप कौन हैं और कहां से आए हैं, जो लोग सो रहे हैं वो कौन हैं और ये बूढ़ी स्त्री कौन हैं। आप लोग जंगली जानवरों और राक्षसों से घिरे इतने घने जंगल में क्या कर रहे हैं।
हिडिम्बा ने भीम को दिया विवाह का प्रस्ताव
हिडिम्बा ने बताया कि हिडिम्बासुर नाम का राक्षस पास में ही है और मैं उसी की बहन हूं। उसने मुझे आप लोगों का मांस खाने के लिए मुझे भेजा है ताकि मैं आप लोगों को मार कर ले जाऊं लेकिन मैं आपके सौंदर्य को देख कर मोहित हो गयी और आपसे विवाह करना चाहती हूं। हिडिम्बा ने कहा मैं सच कहती हूं कि केवल आपसे ही विवाह करना चाहती हूं और अन्य किसी को अपनी पति नहीं बना सकती क्योंकि आप धर्मज्ञ हैं और मैं आपसे प्रेम करती हूं इसलिए आप भी मुझसे प्रेम करें।