#युधिष्ठिर की अनुमति मिलते ही राक्षसी हिडिम्बा के विवाह का प्रस्ताव रखने पर भीम ने रखी यह शर्त

Dharma :  युधिष्ठिर की अनुमति मिलते ही राक्षसी हिडिम्बा के विवाह का प्रस्ताव रखने पर भीम ने रखी यह शर्त 

Dharma :  राक्षसराज हिडिम्ब को मारने के बाद भीम अपनी माता और भाइयों संग वारणावत के जंगलों में आगे बढ़े तो देखा राक्षसी हिडिम्बा भी उनके पीछे आ रही है। इस पर भीमसेन ने उससे कहा, हिडिम्बे ! मैं जानता हूं कि राक्षस मोहनी माया के सहारे पहले वैर का बदला लेते हैं इसलिए तु भी अपने भाई के रास्ते पर जा। इतना कहते हुए वे उसे मारने को लपके तो बड़े भाई युधिष्ठिर ने उन्हें रोका और कहा, हे भीम ! कभी क्रोध में भी स्त्री पर हाथ नहीं छोड़ना चाहिए। हमारे शरीर की रक्षा से भी बढ़ कर धर्म की रक्षा है, तुम धर्म की रक्षा करो। जब तुम इसके भाई को मार चुके हो तो ये हम लोगों का क्या बिगाड़ सकती है। 

राक्षसी हिडिम्बा ने माता कुन्ती के सामने रखी ये बात 

इसके बाद हिडिम्बा ने माता कुन्ती और युधिष्ठिर को प्रणाम कर कुन्ती से कहा, आप जानती हैं कि स्त्रियों को कामदेव की पीड़ा कितनी असहयनीय होती है। मैं आपके पुत्र के कारण बहुत देर से व्यथित हूं और अब मुझे उससे काम सुख मिलना चाहिए। मैं अपने सगे संबंधी, कुटुम्बी और धर्म को तिलांजलि देकर आपके पुत्र का वरण किया है। हिडिम्बा ने कहा कि मैं आप और आपके पुत्र दोनोंं की स्वीकृति प्राप्त करने के योग्य हूं। यदि आप लोग मुझे स्वीकार नहीं करेंगे तो निश्चित जानिए कि मैं अपने प्राण त्याग दूंगी। आप लोग मुझ पर कृपा करिये क्योंकि मैं जैसी भी हूं अब आपकी हूं। मैं आपके पुत्र को लेकर जाऊंगी और थोड़े ही दिनों में लौट आऊंगी। बड़ी से बड़ी कठिनाई और आपत्ति के समय मैं आप लोगों को बचाऊंगी। जो आपातकाल में भी अपने धर्म की रक्षा करता है वही श्रेष्ठ धर्मात्मा है। 

युधिष्ठिर के अनुमति देने पर भीम ने रखी शर्त

युधिष्ठिर ने कहा, हिडिम्बे ! तुम्हारा कहना ठीक है, तुम कभी भी धर्म का उल्लंघन न करना। रोज सूर्यास्त के पहले तक तुम पवित्र होकर भीमसेन की सेवा कर सकती हो। ये दिन भर तुम्हारे साथ रहेंगे और रातो को इन्हें मेरे पास पहुंचा देना। राक्षसी के स्वीकार करने पर भीमसेन ने शर्त रखी, मैं तभी तक तुम्हारे साथ जाया करूंगा जब तक पुत्र नहीं होगा। भीमसेन की इस शर्त को स्वीकार करते ही वह भीम को आकाश मार्ग से ले उड़ी।

 

 

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