Shri Bhaktmal : “श्री भक्तमाल” का संक्षिप्त परिचय
Shreebhaktamal : मेरे हाथ में है गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक “श्री भक्तमाल” जो भगवान के भक्तों की पुनीत गाथा है। इस पुस्तक के रचयिता श्री नाभादास जी हैं जिन्होंने…
Shreebhaktamal : मेरे हाथ में है गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक “श्री भक्तमाल” जो भगवान के भक्तों की पुनीत गाथा है। इस पुस्तक के रचयिता श्री नाभादास जी हैं जिन्होंने…
Dharma : महाभारत की कथा सुनते हुए राजा जनमेजय ने जब ऋषि वैशम्पायन से यह जाना कि कौरवों और पांडवों को गुरु कृपाचार्य ने धनुर्वेद अर्थात धनुष चलाने की शिक्षा…
Dharam : जल विहार में कौरव और पांडवों ने खूब खेला कूदा और विश्राम करने के बाद बिना भीमसेन के ही यह चर्चा करते हुए हस्तिनापुर पहुंच गए कि भीमसेन…
Dharam : भीम की शरारतों से दुर्योधन ने हस्तिनापुर में गंगा नदी में जल विहार की योजना बनायी और गंगा के तट पर कैंप लगवा दिए। युधिष्ठिर ने भी उसके…
Dharam : हस्तिनापुर आने के बाद पांडवों के वैदिक संस्कार कराए गए, जंगल से राजमहल में आने के बाद वे दुर्योधन और अन्य भाइयों के खेलते कूदते हुए बड़े होने…
MATA SATYAVATI : पाण्डु और माद्री का श्राद्ध करने के बाद कुल के सदस्य और हस्तिनापुर की जनता वापस राजधानी में लौट आई लेकिन अभी भी पाण्डु और उनकी छोटी…
PANDU'S DEATH : शतश्रृंग पर्वत पर रहने वाले ऋषि मुनियों को तपस्या कर रहे राजा पाण्डु की मृत्यु का समाचार मिला तो उन्होंने विधि विधान से उनका अंतिम संस्कार किया…
Nakul & Sahdev : युधिष्ठिर, भीमसेन और अर्जुन के जन्म के बाद पाण्डु प्रसन्न तो थे किंतु तीनों पुत्र कुन्ती के गर्भ से हुए थे इसलिए चाहते थे कि माद्री…
Birth of Bhimsen & Arjun : युधिष्ठिर के जन्म के कुछ समय बाद राजा पाण्डु ने कुन्ती से फिर कहा, प्रिये ! क्षत्रिय जाति बल प्रधान है और क्षत्रियों की…
Varaha Avatar : भगवान विष्णु का दूसरा अवतार भी विचित्र प्रकार का और विचित्र परिस्थितियों में हुआ। स्वायंभुव सृष्टि के पहले मनु थे, प्रलय में संसार में सब कुछ डूब…