Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के रचयिता नाभादास जी का परिचय
Shri Bhaktamal : "श्री भक्तमाल” की कथा में आगे बढ़ने के पहले इस ग्रंथ के रचयिता नाभादास की बारे में कुछ रोचक जानकारी जानना जरूरी है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित…
Shri Bhaktamal : "श्री भक्तमाल” की कथा में आगे बढ़ने के पहले इस ग्रंथ के रचयिता नाभादास की बारे में कुछ रोचक जानकारी जानना जरूरी है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित…
Dharma : भरद्वाज मुनि के पुत्र द्रोणाचार्य पिता की मृत्यु के बाद पिता के आश्रम में ही रहकर तप करने लगे। उन्होंने धनुर्वेद के ज्ञाता शरद्वान की पुत्री कृपी से…
Dharma : कौरव और पांडव गुरु कृपाचार्य से धनुर्वेद की शिक्षा ले रहे थे, जिसे देख भीष्म प्रसन्न तो थे लेकिन महसूस कर रहे थे कि इन लोगों को इससे…
Shreebhaktamal : मेरे हाथ में है गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक “श्री भक्तमाल” जो भगवान के भक्तों की पुनीत गाथा है। इस पुस्तक के रचयिता श्री नाभादास जी हैं जिन्होंने…
Dharma : महाभारत की कथा सुनते हुए राजा जनमेजय ने जब ऋषि वैशम्पायन से यह जाना कि कौरवों और पांडवों को गुरु कृपाचार्य ने धनुर्वेद अर्थात धनुष चलाने की शिक्षा…
Dharam : जल विहार में कौरव और पांडवों ने खूब खेला कूदा और विश्राम करने के बाद बिना भीमसेन के ही यह चर्चा करते हुए हस्तिनापुर पहुंच गए कि भीमसेन…
Dharam : भीम की शरारतों से दुर्योधन ने हस्तिनापुर में गंगा नदी में जल विहार की योजना बनायी और गंगा के तट पर कैंप लगवा दिए। युधिष्ठिर ने भी उसके…
Dharam : हस्तिनापुर आने के बाद पांडवों के वैदिक संस्कार कराए गए, जंगल से राजमहल में आने के बाद वे दुर्योधन और अन्य भाइयों के खेलते कूदते हुए बड़े होने…
MATA SATYAVATI : पाण्डु और माद्री का श्राद्ध करने के बाद कुल के सदस्य और हस्तिनापुर की जनता वापस राजधानी में लौट आई लेकिन अभी भी पाण्डु और उनकी छोटी…
PANDU'S DEATH : शतश्रृंग पर्वत पर रहने वाले ऋषि मुनियों को तपस्या कर रहे राजा पाण्डु की मृत्यु का समाचार मिला तो उन्होंने विधि विधान से उनका अंतिम संस्कार किया…