Shri Bhaktamal : श्री वामन अवतार की कथा
Shri Bhaktamal : असुरों के साथ संग्राम में अंततः देवताओं की विजय हुई और इंद्र का स्वर्ग के सिंहासन पर फिर से अभिषेक हुआ। विजय के गर्व में देवता उन…
Shri Bhaktamal : असुरों के साथ संग्राम में अंततः देवताओं की विजय हुई और इंद्र का स्वर्ग के सिंहासन पर फिर से अभिषेक हुआ। विजय के गर्व में देवता उन…
Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” में चौथा अवतार नृसिंह भगवान का है। कथा इस तरह से है कि तीसरे अवतार वराह स्वरूप भगवान ने हिरण्याक्ष का वध किया तो उसकी…
Shri Bhaktamal : भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य अवतार के बाद “श्री भक्तमाल” में आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि भगवान विष्णु का दूसरा अवतार कौन था और…
Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” उसके रचयिता नाभादास जी और टीकाकार प्रियादास जी के बाद भगवान के कुछ प्रमुख अवतारों के बारे में जानिए। संसार में जब-जब किसी तरह का…
Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” ग्रंथ के रचयिता नाभादास के बाद गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महान ग्रंथ की टीका “भक्तिरसबोधिनी” के टीकाकार श्री प्रियादास जी के बारे में जानना जरूरी…
Shri Bhaktamal : "श्री भक्तमाल” की कथा में आगे बढ़ने के पहले इस ग्रंथ के रचयिता नाभादास की बारे में कुछ रोचक जानकारी जानना जरूरी है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित…
Dharma : भरद्वाज मुनि के पुत्र द्रोणाचार्य पिता की मृत्यु के बाद पिता के आश्रम में ही रहकर तप करने लगे। उन्होंने धनुर्वेद के ज्ञाता शरद्वान की पुत्री कृपी से…
Dharma : कौरव और पांडव गुरु कृपाचार्य से धनुर्वेद की शिक्षा ले रहे थे, जिसे देख भीष्म प्रसन्न तो थे लेकिन महसूस कर रहे थे कि इन लोगों को इससे…
Shreebhaktamal : मेरे हाथ में है गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित पुस्तक “श्री भक्तमाल” जो भगवान के भक्तों की पुनीत गाथा है। इस पुस्तक के रचयिता श्री नाभादास जी हैं जिन्होंने…
Dharma : महाभारत की कथा सुनते हुए राजा जनमेजय ने जब ऋषि वैशम्पायन से यह जाना कि कौरवों और पांडवों को गुरु कृपाचार्य ने धनुर्वेद अर्थात धनुष चलाने की शिक्षा…