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भादों महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान श्री कृष्ण चतुर्भुज नारायण स्वरूप में प्रकट हुए।

Shri Bhakatmal :  श्री कृष्ण अवतार की कथा

Shri Bhakatmal : “परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे” अर्थात साधु पुरुषों की रक्षा, दुष्टों का विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता…

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त्रेता युग में भक्तवत्सल भगवान श्री राम चार रूप धारण कर अयोध्या के चक्रवर्ती महाराज श्री दशरथ के पुत्र रूप में चैत्र शुक्ल नवमी को अवतरित हुए।

Shri Bhaktamal : श्री राम अवतार की कथा

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के अनुसार श्री विष्णु जी ने प्रतिज्ञा की थी जब-जब धर्म की हानि होगी, असुर, अधम और अभिमानी लोगों की अधिकता होगी, तब-तब मैं किसी…

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#image_title“श्री भक्तमाल” के अनुसार भगवान विष्णु का छठा अवतार भगवान परशुराम हैं जो यमदग्नि और रेणुका के आठवें पुत्र के रूप में जन्मे थे।

Shri Bhaktamal : श्री परशुराम अवतार की कथा

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के अनुसार भगवान विष्णु का छठा अवतार भगवान परशुराम हैं जो यमदग्नि और रेणुका के आठवें पुत्र के रूप में जन्मे थे। एक बार उनके पिता…

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भगवान विष्णु के पांचवा अवतार एक वामन है।

Shri Bhaktamal : श्री वामन अवतार की कथा

Shri Bhaktamal : असुरों के साथ संग्राम में अंततः देवताओं की विजय हुई और इंद्र का स्वर्ग के सिंहासन पर फिर से अभिषेक हुआ। विजय के गर्व में देवता उन…

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श्री भक्तमाल” में चौथा अवतार नृसिंह भगवान का है।

Shri Bhaktamal  : श्री नृसिंह अवतार की कथा

Shri Bhaktamal  : “श्री भक्तमाल” में चौथा अवतार नृसिंह भगवान का है। कथा इस तरह से है कि तीसरे अवतार वराह स्वरूप भगवान ने हिरण्याक्ष का वध किया तो उसकी…

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भगवान विष्णु का दूसरा अवतार एक वाराह अर्थात जंगली सुअर या शूकर का है।

Shri Bhaktamal : श्री वाराह अवतार की कथा

Shri Bhaktamal : भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य अवतार के बाद “श्री भक्तमाल” में आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि भगवान विष्णु का दूसरा अवतार कौन था और…

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भगवान के अनंत अवतार हैं और अनंत लीलाएं भी लेकिन भगवान ने जो पहला अवतार लिया वह मत्स्य अर्थात मछली का अवतार है।

Shri Bhaktamal : श्री मत्स्यावतार की कथा 

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” उसके रचयिता नाभादास जी और टीकाकार प्रियादास जी के बाद भगवान के कुछ प्रमुख अवतारों के बारे में जानिए। संसार में जब-जब किसी तरह का…

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“भक्तिरसबोधिनी” के टीकाकार श्री प्रियादास जी ने सरल शब्दों में जनमानस को भगवान के भक्तों के बारे में जानकारी दी।

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के टीकाकार प्रियादास जी का परिचय

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” ग्रंथ के रचयिता नाभादास के बाद गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महान ग्रंथ की टीका “भक्तिरसबोधिनी” के  टीकाकार श्री प्रियादास जी के बारे में जानना जरूरी…

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“श्री भक्तमाल” के रचयिता नाभादास जी का परिचय

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के रचयिता नाभादास जी का परिचय

Shri Bhaktamal : "श्री भक्तमाल” की कथा में आगे बढ़ने के पहले इस ग्रंथ के रचयिता नाभादास की बारे में कुछ रोचक जानकारी जानना जरूरी है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित…

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Read more about the article Dharma : द्रोण ने कृपी से विवाह कर पुत्र को दिया जन्म, जानिए उसके नामकरण का रहस्य और मित्र राजा द्रुपद से मिलने पर क्या हुआ 
द्रोणाचार्य पिता की मृत्यु के बाद पिता के आश्रम में ही रहकर तप करने लगे। उन्होंने धनुर्वेद के ज्ञाता शरद्वान की पुत्री कृपी से विवाह कर लिया।

Dharma : द्रोण ने कृपी से विवाह कर पुत्र को दिया जन्म, जानिए उसके नामकरण का रहस्य और मित्र राजा द्रुपद से मिलने पर क्या हुआ 

Dharma : भरद्वाज मुनि के पुत्र द्रोणाचार्य पिता की मृत्यु के बाद पिता के आश्रम में ही रहकर तप करने लगे। उन्होंने धनुर्वेद के ज्ञाता शरद्वान की पुत्री कृपी से…

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