Shri Bhakatmal : श्री कृष्ण अवतार की कथा
Shri Bhakatmal : “परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे” अर्थात साधु पुरुषों की रक्षा, दुष्टों का विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता…
Shri Bhakatmal : “परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम्, धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे” अर्थात साधु पुरुषों की रक्षा, दुष्टों का विनाश और धर्म की स्थापना के लिए मैं युग-युग में प्रकट होता…
Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के अनुसार श्री विष्णु जी ने प्रतिज्ञा की थी जब-जब धर्म की हानि होगी, असुर, अधम और अभिमानी लोगों की अधिकता होगी, तब-तब मैं किसी…
Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के अनुसार भगवान विष्णु का छठा अवतार भगवान परशुराम हैं जो यमदग्नि और रेणुका के आठवें पुत्र के रूप में जन्मे थे। एक बार उनके पिता…
Shri Bhaktamal : असुरों के साथ संग्राम में अंततः देवताओं की विजय हुई और इंद्र का स्वर्ग के सिंहासन पर फिर से अभिषेक हुआ। विजय के गर्व में देवता उन…
Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” में चौथा अवतार नृसिंह भगवान का है। कथा इस तरह से है कि तीसरे अवतार वराह स्वरूप भगवान ने हिरण्याक्ष का वध किया तो उसकी…
Shri Bhaktamal : भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य अवतार के बाद “श्री भक्तमाल” में आगे बढ़ते हैं और जानते हैं कि भगवान विष्णु का दूसरा अवतार कौन था और…
Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” उसके रचयिता नाभादास जी और टीकाकार प्रियादास जी के बाद भगवान के कुछ प्रमुख अवतारों के बारे में जानिए। संसार में जब-जब किसी तरह का…
Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” ग्रंथ के रचयिता नाभादास के बाद गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महान ग्रंथ की टीका “भक्तिरसबोधिनी” के टीकाकार श्री प्रियादास जी के बारे में जानना जरूरी…
Shri Bhaktamal : "श्री भक्तमाल” की कथा में आगे बढ़ने के पहले इस ग्रंथ के रचयिता नाभादास की बारे में कुछ रोचक जानकारी जानना जरूरी है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित…
Dharma : भरद्वाज मुनि के पुत्र द्रोणाचार्य पिता की मृत्यु के बाद पिता के आश्रम में ही रहकर तप करने लगे। उन्होंने धनुर्वेद के ज्ञाता शरद्वान की पुत्री कृपी से…