Shri Bhaktamal : श्री सूत जी की कथा
Shri Bhaktamal : भगवान वेद व्यास जी के परमशिष्य रोमहर्षण चूंकि सूत समाज के थे इसीलिए वे सूत जी के रूप में विख्यात हुए। भगवान व्यास ने इन्हें पुराणों को…
Shri Bhaktamal : भगवान वेद व्यास जी के परमशिष्य रोमहर्षण चूंकि सूत समाज के थे इसीलिए वे सूत जी के रूप में विख्यात हुए। भगवान व्यास ने इन्हें पुराणों को…
Shri Bhaktamal : श्री शेष जी जिन्हें शेषनाग या आदिशेष भी कहा जाता है, एक दिव्य सर्प हैं और भगवान आदि पुरुष नारायण की शैय्या के रूप में जाने जाते…
Shri Bhaktamal : सुभद्रा नंदन अभिमन्यु की पत्नी महाराज विराट की पुत्री उत्तरा गर्भवती थीं। वह गर्भ ही कौरव और पांडवों का एकमात्र वंशधर था। अश्वत्थामा ने वंश समाप्त करने…
वारणावत में युधिष्ठिर अपनी माता और भाइयों के साथ पहुंचे तो वहां के नागरिकों ने सबका खूब आदर सत्कार किया। करीब 10 दिनों तक रहने के बाद दुर्योधन के दूत…
Dharma : महाराज धृतराष्ट्र के आदेश और दुर्योधन की कुटिल योजना की तरह युधिष्ठिर अपने भाइयों और मां कुन्ती के साथ वारणावत के लिए चले तो हस्तिनापुर की प्रजा भी…
Dharma : धृतराष्ट्र ने जैसे ही पांडवों से वारणावत की सैर करने की आज्ञा दी, दुर्योधन अंदर ही अंदर प्रसन्न हुआ क्योंकि उसे अपनी योजना साकार होती दिख रही थी।…
Shri Bhaktamal : ब्रह्मा जी के मानस पुत्र स्वायमभुव मनु के पुत्र प्रियव्रत जी जन्म से ही भगवान के परम भक्त थे। देवर्षि नारद की कृपा से उन्होंने परमार्थतत्व को…
Shri Bhaktamal : सूर्यवंश का इक्ष्वाकुकुल वही है जिसमें मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने जन्म लिया था। इसी वंश में प्रतापी महाराज मान्धाता हुए जिनके पुत्र महाराज मुचुकुन्द थे। वे…
Shri Bhaktamal : ध्रुव जी के वंश में राजर्षि उत्सुक और माता पुष्करिणी ने भगवान की तपस्या कर अंग जैसा पुत्र प्राप्त किया, जो शील स्वभाव, साधुता, ब्रह्मण्यता आदि तमाम…
Dharma : युधिष्ठिर के युवराज बनने और फिर बाद में राजा बनने को लेकर दुर्योधन ने अपने और अपने परिवार के भविष्य कि चिंता पिता महाराज धृतराष्ट्र से करते हुए…