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वास्तव में गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से संसार को गीता का उपदेश दिया था।

Shrimad Bhagwat Geeta : गीता को समझ कर मनन करना ही श्री कृष्ण की असली पूजा

Shrimad Bhagwat Geeta : जन्माष्टमी पर भगवान श्री कृष्ण के तत्व को समझने के लिए उनके जन्मसार को समझने के साथ गीता को भी समझना जरुरी है। वास्तव में गीता…

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Read more about the article Lord Brahma : ब्रह्मा जी के दरबार में गंगा के अचानक उपस्थित होने से, ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से राजर्षि महाभिष को मिला शाप, जानिए फिर कहां हुआ उनका जन्म 
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Lord Brahma : ब्रह्मा जी के दरबार में गंगा के अचानक उपस्थित होने से, ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से राजर्षि महाभिष को मिला शाप, जानिए फिर कहां हुआ उनका जन्म 

Lord Brahma : वैशम्पायन ऋषि ने राजा जनमेजय को महाभारत की कथा बताते हुए उनके पूर्वज राजा शांतनु के जन्म और विवाह का रोचक प्रसंग सुनाते हुए पहले के सारे…

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Read more about the article Kuruvansh : कुरुवंश को चलाने का संकट हुआ पैदा तो किस तरह शांतनु की पत्नी सत्यवती ने निकाला हल, कौन थे व्यास और उन्होंने क्या किया
कुरुवंश को चलाने का संकट हुआ पैदा तो किस तरह शांतनु की पत्नी सत्यवती ने निकाला हल, कौन थे व्यास और उन्होंने क्या किया

Kuruvansh : कुरुवंश को चलाने का संकट हुआ पैदा तो किस तरह शांतनु की पत्नी सत्यवती ने निकाला हल, कौन थे व्यास और उन्होंने क्या किया

Kuruvansh : कुरुवंश के राजा शांतनु के स्पर्श की विशेषता थी कि वे जिस किसी वृद्ध को छू लेते थे, उसका यौवन ही नहीं लौटता था बल्कि उसे सभी सुख…

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Legacy of Kuruvansh : जानिए कुरुवंश का प्रवर्तन किसने किया, यह भी जानिए राजा शांतनु के किसी को छूने से क्या हो जाता था

Legacy of Kuruvansh : पुरुवंश के राजा हस्ती ने गंगा नदी के तट पर हस्तिनापुर की स्थापना की जो कुरु साम्राज्य की राजधानी बना। यह वर्तमान उत्तर प्रदेश के मेरठ…

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Read more about the article Legacy of Purvansh : राजा जनमेजय ने वैशम्पायन ऋषि से कौन सा प्रश्न किया जो उन्होंने उनकी पूरी वंशावली सामने रख दी, जानिए हस्तिनापुर की स्थापना किसने की 
ऋषि ने कहा राजा दक्ष से अदिति, अदिति से विवस्वान, विवस्वान से मनु, मनु से इला, इला से पुरुरवा, पुरुरवा से आयु, आयु से नहुष और नहुष से राजा ययाति का जन्म हुआ।

Legacy of Purvansh : राजा जनमेजय ने वैशम्पायन ऋषि से कौन सा प्रश्न किया जो उन्होंने उनकी पूरी वंशावली सामने रख दी, जानिए हस्तिनापुर की स्थापना किसने की 

Legacy of Purvansh : राजा जनमेजय ने महाभारत की कथा सुनने के क्रम में महर्षि कृष्ण द्वैपायन के शिष्य वैशम्पायन से प्रार्थना की कि अब मुझे उस गौरवशाली पुरु वंश…

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Read more about the article Dharam : अष्टक मुनि, वसुमान, प्रतर्दन और औशीनर शिवि के संग राजा ययाति स्वर्ग की ओर चले तो राजा ने बताया एक गुप्त रहस्य, आप भी जानिए
स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर रहे रहे राजा ययाति को बीच में ही रोक कर अष्टक मुनि ने जब यह जान लिया कि वे सार्वभौम राजा होने के बाद भी धर्मात्मा, सत्यनिष्ठ, कर्तव्यपरायण व विद्वान हैं।

Dharam : अष्टक मुनि, वसुमान, प्रतर्दन और औशीनर शिवि के संग राजा ययाति स्वर्ग की ओर चले तो राजा ने बताया एक गुप्त रहस्य, आप भी जानिए

Dharam : स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर रहे रहे राजा ययाति को बीच में ही रोक कर अष्टक मुनि ने जब यह जान लिया कि वे सार्वभौम राजा होने के…

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Read more about the article Swarg ki Yatra : पृथ्वी की ओर लटकते ययाति को चारों मुनियों ने अपने पुण्य दिए, जानिए क्यों उन्होंने मना किया और फिर सब स्वर्ग को चले
स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर रहे रहे राजा ययाति को बीच में ही रोक कर अष्टक मुनि ने उनसे कई प्रश्न किए जिससे उनके धर्मात्मा, सत्यनिष्ठ, कर्तव्यपरायण व विद्वान होने की पुष्टि हो गयी।

Swarg ki Yatra : पृथ्वी की ओर लटकते ययाति को चारों मुनियों ने अपने पुण्य दिए, जानिए क्यों उन्होंने मना किया और फिर सब स्वर्ग को चले

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Read more about the article Dharam : अष्टक मुनि के पूछने पर, राजा ययाति ने ब्रह्मचारी गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यासी की ये बताई विशेषताएं
अष्टक मुनि ने राजा ययाति से जानना चाहा कि ब्रह्मचारी, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यासी को किस तरह के धर्मों का पालन करना चाहिए कि मृत्यु के बाद वे सुखी रहें।

Dharam : अष्टक मुनि के पूछने पर, राजा ययाति ने ब्रह्मचारी गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यासी की ये बताई विशेषताएं

Dharam : ऋषि वैशम्पायन जी ने राजा जनमेजय को महाभारत की कथा बताते हुए कहा जब स्वर्ग से आपके पूर्वज राजा ययाति अष्टक मुनि के आश्रम के निकट गिर रहे…

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Read more about the article Dharam : स्वर्ग में भोग कर रहे ययाति के पुण्य नष्ट होने पर वे कहां गिरे, किससे हुई भेंट फिर उन्होंने क्या किए प्रश्न
ययाति स्वर्ग से उस स्थान पर गिरे जहां अष्टक, प्रतर्दन, वसुमान् और शिवि जैसे श्रेष्ठ तपस्वी तप साधना में लीन थे।

Dharam : स्वर्ग में भोग कर रहे ययाति के पुण्य नष्ट होने पर वे कहां गिरे, किससे हुई भेंट फिर उन्होंने क्या किए प्रश्न

Dharam : तप के मामले में मनुष्य, देवता गंधर्व और महर्षियों से अपने को श्रेष्ठ बताने से राजा ययाति की तपस्या का पुण्य नष्ट हो गया और उन्हें स्वर्ग छोड़ने…

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Read more about the article Dharam : ऐसा क्या कर दिया राजा ययाति ने जो उन्हें उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी, उन्हेंं स्वर्ग भी छोड़ने को मजबूर होना पड़ा
स्वर्ग में रहते हुए उन्होंने हजारों वर्ष बिता दिए जहां इंद्र, साध्य, मरुत, वसु आदि सभी उनका सम्मान करते थे।

Dharam : ऐसा क्या कर दिया राजा ययाति ने जो उन्हें उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी, उन्हेंं स्वर्ग भी छोड़ने को मजबूर होना पड़ा

Dharam : राजा ययाति ने पुत्र से उसकी जवानी उधार मांगी और एक हजार वर्षों तक सुखपूर्वक जीवन जीने के बाद वानप्रस्थ आश्रम में चले गए। यहां पर उन्होंने तपस्वी…

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