एक बार की बात है किसी नगर में देवराज नाम का एक ब्राह्मण रहता था जो वैदिक धर्म से बिल्कुल ही विमुख था. जीवन में किसी भी नियम का पालन न करने वाला और महिलाओं पर गलत दृष्टि भी रखता था. या यूं कहा जाए कि उसने कोई भी अच्छा कार्य नहीं किया था यहां तक कि दूसरों को मारकर उनका पैसा हड़प कर जाता और और उसी से अपना जीवन यापन भी करता था. वह घूमते घूमते वर्तमान प्रयागराज के झूसी अर्थात प्रतिष्ठानपुर में पहुंचा. वहां के एक शिव मंदिर में बहुत से साधु महात्मा एकत्र थे, देवराज भी उन्हीं के बीच में ठहर गया. वहीं पर उसे तेज बुखार आने लगा जहां एक कथा वाचक शिव पुराण की कथा सुना रहे थे तो वहां रुकते हुए मजबूरी में वह भी कथा सुनता रहा. एक महीने तक शिव पुराण की कथा सुनते सुनते बुखार में ही वह चल बसा.
