महाराज धृतराष्ट्र के सलाह मांगने पर गुरु द्रोणाचार्य ने कहा कि धर्म यही कहता है कि पांडवों को आधा राज्य दे दिया जाए।

Dharma : पांडवों के लाने के बारे में भीष्म और द्रोण की सलाह के बाद कर्ण ने ऐसा क्या कहा जो द्रोण ने डांट दिया

Dharma : महाराज धृतराष्ट्र के सलाह मांगने पर गुरु द्रोणाचार्य ने कहा कि धर्म यही कहता है कि पांडवों को आधा राज्य दे दिया जाए। आप किसी सज्जन पुरुष को तमाम भेंट देकर द्रुपद के यहां भेज कर पांडवों और उनकी बहू द्रौपदी को यहां बुलवाइए। साथ ही वह व्यक्ति द्रुपद से कहे कि आपके पवित्र वंश में संबंध होने से कुरुवंश, राजा धृतराष्ट्र और दुर्योधन को बहुत प्रसन्नता हुई है। इसे वे अपने कुल और गौरव की वृद्धि मानते हैं।  इसके बाद वह कुन्ती और पांडवों को आश्वासन दे और उनके आश्वस्त हो शांत हो जाने तथा उनके मन में आपके प्रति विश्वास होने पर उन्हें यहां राज्य में आने का आमन्त्रण दें। 

गुरु द्रोण ने कहा कि राजा द्रुपद की ओर से सहमति होने पर यहां से दुःशासन और विकर्ण सेना और सामन्तों के साथ जाकर सम्मान पूर्वक द्रौपदी और पांडवों को ले आवें। इस तरह मैं भी महात्मा भीष्म के सुझाव का अनुमोदन करता हूं और आपके हित में सलाह दे रहा हूं। इसी में आपके वंश की भलाई है। भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य की बातें सुन कर कर्ण जल भुन रहा था। दोनों लोगों के सुझाव आने के बाद कर्ण की बारी आई तो उसने कहा, महाराज पितामह भीष्म और द्रोणाचार्य सम्मानित हैं और आप भी अक्सर इनसे अपने हित की सलाह ही लेते रहते हैं। 

कर्ण ने पितामह और गुरु द्रोण की बात काटना चाहा

कर्ण ने अपनी बात रखते हुए महाराज धृतराष्ट्र से कहा, यदि विधाता ने आपके भाग्य में राज्य लिखा है तो सारे संसार के शत्रु होने पर भी उसे कोई आपके हाथ से नहीं छीन सकता है। यदि कोई अपने हृदय के भावों को छिपा कर बुरे इरादे से अमंगल को मंगल बताए तो समझदार पुरुष को उसका कहा नहीं मानना चाहिए। आप तो स्वयं बुद्धिमान हैं, मंत्रियों से मिली सलाह अच्छी है या नहीं इसका निर्णय आप स्वयं कीजिए क्योंकि आप अपना हित और अहित तो भलीभांति समझते हैं। 

कर्ण को द्रोण ने बीच में ही टोंका

कर्ण के इतना बोलने पर बीच में ही टोंकते हुए गुरु द्रोण ने कहा, अरे कर्ण ! मैं तेरी दुष्टता को समझ रहा हूं। तेरा हृदय दुर्भाव से भरा हुआ है। तू पांडवों का नुकसान करने के लिए हम लोगों की अच्छी सलाह को भी गलत साबित करने की कोशिश कर रहा है। मैंने और भीष्म जी ने तो कुरुवंश की रक्षा और हित की बात कही है। मैं साफ कहे देता हूं कि हमारी सलाह न मानने से कुरुवंश का शीघ्र ही विनाश होगा।    

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