द्रौपदी हाथों में वरमाला लेकर प्रसन्नता से अर्जुन के पास पहुंची उसे उनके गले में डाल दिया।

Dharma : स्वयंवर मंडप में जैसे ही अर्जुन ने लक्ष्यवेध किया, द्रौपदी ने वरमाला डाली जानिए फिर वहां के राजाओं ने क्या किया 

Dharma : द्रौपदी के स्वयंवर उत्सव सभा मंडप में जब सभी क्षत्रिय वीर राजा लक्ष्य को नहीं वेध सके तो ब्राह्मणों के बीच से अर्जुन खड़े हो गए। उन्हें धनुष चढ़ाने के लिए तैयार देख ब्राह्मण भी चौंक गए और आपस में तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। इधर ब्राह्मणों में चर्चाएं ही हो रही थीं कि अर्जुन धनुष के पास तक पहुंच गए। 

ब्राह्मणों के बीच से उठे अर्जुन ने लक्ष्य वेधा

सबसे पहले उन्होंने हाथ जोड़ धनुष की प्रदक्षिणा की, भगवान शंकर और श्रीकृष्ण को सिर झुकाकर मन ही मन प्रणाम किया। अर्जुन ने बड़ी आसानी से धनुष को उठा कर उसकी डोर चढ़ा दी लोग समझ पाते तब तक अर्जुन ने पांच में एक बाण इस तरह लक्ष्य पर चलाया कि घूमे हुए यंत्र के छेद में होकर बाण जमीन पर गिर पड़ा. हर तरफ शोर होने लगा और अर्जुन के सिर पर दिव्य पुष्पों की वर्षा भी होने लगी। ब्राह्मण भी अपने दुपट्टे लहरा कर प्रसन्नता व्यक्त करने लगे। अर्जुन द्वारा लक्ष्यवेध को देखकर महाराज द्रुपद की प्रसन्नता की कोई सीमा न रही। जब युधिष्ठर ने देखा कि अर्जुन ने अपना काम कर लिया है तो वे नकुल और सहदेव को लेकर अपने निवास स्थान पर चले आए। 

द्रौपदी ने अर्जुन के गले में डाली वरमाला

द्रौपदी हाथों में वरमाला लेकर प्रसन्नता से अर्जुन के पास पहुंची उसे उनके गले में डाल दिया। ब्राह्मणों ने अर्जुन का सत्कार किया और द्रौपदी को साथ ले स्वयंवर सभागार से बाहर निकल आए। जब अन्य राजाओं ने देखा की द्रुपद भी अपनी कन्या द्रौपदी का विवाह एक ब्राह्मण से करना चाहते हैं तो सब के सब बहुत ही क्रोधित हुए और एक दूसरे से कहने लगे, देखो तो सही ! राजा द्रुपद ने हम लोगों को तिनके तरह तुच्छ समझ कर अपनी श्रेष्ठ कन्या का विवाह एक ब्राह्मण के साथ कर देना चाहते हैं। हम लोगों को बुलाकर ऐसा तिरस्कार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में इसका वध करना ही उचित होगा। क्या हम में से कोई भी ऐसा नहीं है जिससे यह अपनी पुत्री का विवाह करे। यह स्वयंवर तो क्षत्रियों के लिए है फिर इसमें ब्राह्मण आए ही क्यों। उन्होंने कहा  ब्राह्मण को मारना ठीक नहीं और इस राजा को ही मार डालते हैं और सब उनकी ओर दौड़े।  

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