Dharma : माता कुन्ती ने जानबूझ कर जब भीम को बक नाम के राक्षस के पास भेजा तभी युधिष्ठिर आदि चारो पांडव वहां आ पहुंचे तो मां ने उन्हें पूरी बात बतायी। उनकी बात समझ युधिष्ठिर ने कहा, मां ! आपने धर्म का कार्य किया है। भीमसेन अवश्य ही उस राक्षस को मार देगा क्योंकि आपके हृदय में ब्राह्मण की रक्षा का विशुद्ध धर्म भाव है।
भीम बकासुर के लिए खाना लेकर पहुंचे
राजा जनमेजय महाभारत की कथा ऋषि वैशम्पायन जी से रस लेकर सुन रहे थे। उन्होंने बताया कि जैसे ही भीमसेन भोजन लेकर जंगल में पहुंचे तो बकासुर का नाम लेकर पुकारा और खुद बैठ गए उसका भोजन करने। जैसे ही बकासुर आया और उसने देखा कि उसके लिए भोजन लाने वाला उसे देने के बजाय खुद ही खा रहा है तो क्रोध में उसकी आंखें लाल-लाल हो गयीं, वह भीम को मारने के लिए दौड़ा। बकासुर बहुत जोर से चीखा, लगता है तू तुरंत ही यमलोक जाना चाहता है। भीम उसकी बात पर ध्यान देने के बजाय मुस्कुराए और मुंह फेर कर खाने में जुटे रहे तो उसका क्रोध और भी भयानक हो गया। बकासुर ने भीम की पीठ पर दो घूंसे जमाए लेकिन भीमसेन ने खाना बंद नहीं किया।
बकासुर का वध
और भी क्रोधित होकर बकासुर ने एक बड़ा सा पेड़ उखाड़ा और उनकी ओर झपटा। बकासुर ने जो पेड़ फेंका उसे भीम ने बाएं हांथ से पकड़ कर बकासुर पर भी फेंक दिया। इसके बाद दोनों तरफ से पेड़ फेंके जाने लगे। बक ने भीम को हाथों से पकड़ कर घसीटा लेकिन कुछ ही देर में थक गया तो भीम ने उसे जमीन पर पटक कर घुटनों से रगड़ा। भीम ने उसकी कमर ही मरोड़ दी। उसके मुंह से खून निकलने लगा और पसलियां टूटने से अंत हो गया। बकासुर की चिल्लाहट सुन उसके परिवार के दूसरे राक्षस भी वहां आ गए लेकिन जब देखा कि भीमसेन ने तो उसे मार ही दिया है तो सब बेहोश होकर गिर पड़े। भीम ने सबको ढांढस बंधाया और सीख दी कि कभी मनुष्यों को न परेशान करना। सब उस जंगल से भाग गए और भीमसेन बकासुर की लाश लेकर नगर के बाहर पहुंचे और उसे वहीं पर फेंक कर चुपचाप घर को चले गए और बड़े भाई युधिष्ठर को पूरी घटना बताया।
लोग भीम का कारनामा जान ही नहीं पाए
नगर वासियों ने सुबह जागने पर देखा कि नगर के द्वार पर बकासुर मरा पड़ा है तो हजारों लोग उसे देखने को उमड़ पड़े। सबने सोचा कि बला टली इसलिए अपने-अपने ईष्टदेव की आराधना की। इसके बाद सब पता लगाने लगे कि आज किसकी बारी है तो लोग उस ब्राह्मण के घर की वास्तविकता जानने पहुंच गए। उन्होंने बताया कि रात में एक मंत्र सिद्ध ब्राह्मण ने मेरे परिवार सहित रोने का कारण पूछा तो प्रसन्नता पूर्वक विश्वास दिलाया कि आज राक्षस का भोजन लेकर वे स्वयं जाएंगे, लगता है ये उन्हीं का कार्य है। जानकारी पा सारे नगर वासी ब्रह्मोत्सव मनाने लगे। पांडव भी यह सब देख उसी नगरी में रहने लगे।