हिडिम्बा से घटोत्कच का जन्म होने के बाद भीम वापस अपने परिवार में आ गए और युधिष्ठिर आदि पांडव अपनी मां के साथ एकचक्रा नगरी में रहने लगे।

Dharma : जानिए कुन्ती ने जिस ब्राह्मण देव के घर पुत्रों सहित शरण पाई उसे उसकी रक्षा का आश्वासन क्यों दिया

Dharma : हिडिम्बा से घटोत्कच का जन्म होने के बाद भीम वापस अपने परिवार में आ गए और युधिष्ठिर आदि पांडव अपनी मां के साथ एकचक्रा नगरी में रहने लगे। वे भिक्षा मांग कर जीवन यापन करते शाम को मां के सामने समर्पित कर देते। मां भी आधा भीमसेन को और बाकी में सब लोगों में बांट देती थी।

ब्राह्मण देव के परिवार पर आया संकट 

एक दिन सब लोग भिक्षा लेने निकले लेकिन भीमसेन माता के पास ही रह गए। जिस ब्राह्मण के घर पर वे रुके थे उसके यहां करुण पुकार होने लगी। उन्हें रोते देख कुन्ती ने द्रवित हो भीमसेन से कहा, बेटा ! हम लोग इनके घर में रहते हैं और ये भी हम लोगों की मदद करते हैं। हमें इनकी मदद करनी चाहिए। इस पर भीम ने कहा, मां आप पता लगाओ इन्हें कौन सा दुख है और इनकी क्या सहायता की जा सकती है। कुन्ती उनके घर के भीतर गयी और आपस में चर्चा कर रहे ब्राह्मण देव से उनके दुख का कारण पूछा। ब्राह्मण ने बताया पास में ही बक नाम का राक्षस रहता है, जिसे रोज एक गाड़ी अन्न तथा दो भैंसे देने पड़ते हैं। आज हमारे परिवार की बारी है यदि उसे नहीं भेजा तो वह पूरे कुटुम्ब को खा जाएगा। यहां का राजा भी कुछ नहीं करता है। मुझे भी भोजन के लिए अन्न और एक मनुष्य देना पड़ेगा लेकिन मेरे पर पैसा ही नहीं है। कुन्ती ने उन्हें आश्वस्त किया कि आप बिल्कुल भी न डरें, मैं उससे छुटकारा दिला दूंगी क्योंकि आपके एक ही बेटा और बेटी है जबकि मेरे पांच पुत्र हैं। इन्हीं में से एक बेटा उस राक्षस के लिए भोजन लेकर जाएगा। 

कुन्ती ने लिया सोच समझ कर निर्णय

ब्राह्मण देवता ने उन्हें ऐसा करने से अतिथि कह कर मना किया कि अतिथि की सदैव रक्षा करनी चाहिए। कुन्ती ने अपने तर्कों से ब्राह्मण को संतुष्ट करते हुए कहा कि ब्राह्मण की रक्षा करना सबका करनी चाहिए और मैं अपने पुत्र का भी अनिष्ट नहीं चाहती। वह राक्षस मेरे बेटे का कुछ भी नहीं कर सकेगा क्योंकि मेरे बलशाली पुत्र न जाने कितने राक्षसों को मारा है लेकिन एक बात ध्यान रखिए कि इसकी सूचना आप किसी को भी न दें। इसके बाद कुन्ती ने भीमसेन को राक्षस के पास भेजने का निर्णय कर लिया। जिस समय भीम ने मां के आदेश के पालन की प्रतिज्ञा की तभी युधिष्ठिर आदि भिक्षा लेकर लौट आए। भीम के आकार को देख युधिष्ठिर ने मां से प्रश्न किया, मां आप दूसरे की रक्षा के लिए अपने ही पुत्र को संकट में डालना चाहती हैं। मां ने कहा, भीम ऐसा कर धर्म का कार्य ही करेगा।

 

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