#लाक्षागृह से बच कर निकलते हुए पांडव माता कुन्ती के साथ गंगातट पर पहुंचे तो उन्हें विदुर जी का भेजा हुए व्यक्ति मिला।

Dharma : लाक्षागृह से गोपनीय तरीके से निकल गए और छह शवों को देख कौरवों ने कर दिया अंतिम संस्कार 

Dharma : लाक्षागृह से बच कर निकलते हुए पांडव माता कुन्ती के साथ गंगातट पर पहुंचे तो उन्हें विदुर जी का भेजा हुए व्यक्ति मिला। उसने कहा नौका तैयार है, उनका संदेश है कि आप लोग इस पर सवार हो गंगा पार पहुंच जाएं। गंगापार होने के बाद भी वो लोग छिपते हुए आगे बढ़ते रहे। 

वारणावत के लोगों ने की धृतराष्ट्र की आलोचना

इधर वारणावत में पूरी रात बीत जाने पर सारे लोग पांडवों को देखने पहुंचे। आग बुझाने में उन्हें पता लगा कि यह तो घर तो लाख का बना था और पांडवों सहित मंत्री पुरोचन भी इसी में जल कर राख हो गया। सबने विचार किया कि मिल कर महाराज धृतराष्ट्र के पास संदेश भेजें कि दुष्ट दुर्योधन के कहने पर उनका मनोरथ पूरा हुआ। उन लोगों को इस बात पर भी आश्चर्य हुआ कि भीष्म, विदुर और दूसरे कौरव भी धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं। अशुभ समाचार सुन धृतराष्ट्र ने दुख व्यक्त करते हुए कौरवों को आज्ञा दी कि तुम लोग तुरंत ही वारणावत जाओ और पांडवों तथा कुन्ती का विधिपूर्वक अंतिम संस्कार करो, विदुर को तो सब मालूम था फिर भी उन्होंने शोक व्यक्त किया। 

जल की तलाश में निकले भीम

इधर पांडव नाव से उतरने के बाद दक्षिण दिशा की ओर बढ़े हालांकि नींद के कारण उन लोगों की आंखें बंद हो रही थीं। ऐसे में भीमसेन ने पहले की तरह सबको लादा और तेजी से चलने लगे। प्यास से तो सभी व्याकुल थे लेकिन जब कुन्ती ने कहा तो भीम ने सबको एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठा कर आराम करने की सलाह दी और खुद पानी की तलाश में निकल पड़े। पास में एक झील पर पहुंच उन्होंने जल पीकर स्नान किया और अंगौछे में भर कर ले आए। 

दुर्योधन के वध को उतावले हुए भीम

पेड़ के नीचे माता सहित भाइयों को सोता देख वे सोच में डूब गए कि जो भाई और माता कोमल सेज पर सोती थीं, अब सब जमीन पर सो रहे हैं। दुरात्मा दुर्योधन ने हम लोगों को घर से ही नहीं निकाला बल्कि जलाने का प्रयास भी किया लेकिन किस्मत की वजह से बच गए। यही सब सोच कर भीमसेन क्रोध में दुर्योधन का वध करने को उतावले होने लगे लेकिन सबको सोता देख खुद पहरा देने लगे।

  

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