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भगवान के अनंत अवतार हैं और अनंत लीलाएं भी लेकिन भगवान ने जो पहला अवतार लिया वह मत्स्य अर्थात मछली का अवतार है।

Shri Bhaktamal : श्री मत्स्यावतार की कथा 

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” उसके रचयिता नाभादास जी और टीकाकार प्रियादास जी के बाद भगवान के कुछ प्रमुख अवतारों के बारे में जानिए। संसार में जब-जब किसी तरह का…

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“भक्तिरसबोधिनी” के टीकाकार श्री प्रियादास जी ने सरल शब्दों में जनमानस को भगवान के भक्तों के बारे में जानकारी दी।

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के टीकाकार प्रियादास जी का परिचय

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” ग्रंथ के रचयिता नाभादास के बाद गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित महान ग्रंथ की टीका “भक्तिरसबोधिनी” के  टीकाकार श्री प्रियादास जी के बारे में जानना जरूरी…

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“श्री भक्तमाल” के रचयिता नाभादास जी का परिचय

Shri Bhaktamal : “श्री भक्तमाल” के रचयिता नाभादास जी का परिचय

Shri Bhaktamal : "श्री भक्तमाल” की कथा में आगे बढ़ने के पहले इस ग्रंथ के रचयिता नाभादास की बारे में कुछ रोचक जानकारी जानना जरूरी है। गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित…

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