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ज्योतिषी विधाता के स्वरूप कैसे हो सकते हैं, इस पर रमेश चिंतक ने एक प्रसंग सुनाया। बात त्रेता युग की है। अवसर था-प्रभु राम और माता जानकी के विवाह का

VEDEYE TALK : …साबित कर दिया, ये ज्योतिषी तो विधाता के ही स्वरूप हैं

VEDEYE TALK : इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेज (आईकास) कानपुर चैप्टर के तत्वावधान में “2025 का भारत-ज्योतिष के दर्पण में” संगोष्ठी का आयोजन रविवार को किदवई नगर के कौशल्या देवी…

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कुण्डली का पहला भाव: जानें जन्म से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी, व्यक्तित्व और भाग्य की दिशा का रहस्य

Shashishekhar Tripathi  ज्योतिष शास्त्र में कुण्डली का पहला भाव, जिसे 'लग्न' या 'जन्म भाव' भी कहा जाता है, व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण आधार होता है. यह भाव जातक…

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कुण्डली के द्वितीय भाव से जानें धन, प्रतिष्ठा और प्रारम्भिक जीवन के गूढ़ रहस्य: बृहस्पति और शुक्र के प्रभाव से समझें आपके जीवन का कोष

Shashishekhar Tripathi  ज्योतिष शास्त्र में द्वितीय भाव, जिसे 'धन भाव' या 'कोष भाव' भी कहा जाता है, व्यक्ति के जीवन में धन-संपत्ति, खान-पान और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण…

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कुण्डली के तृतीय भाव से जानें परिश्रम, पराक्रम और छोटे भाई-बहनों का गूढ़ रहस्य: मंगल और बुध के प्रभाव से समझें जातक के जीवन की दिशा

Shashishekhar Tripathi  ज्योतिषशास्त्र में तृतीय भाव को कर्मभाव या पराक्रम भाव कहा जाता है, जो व्यक्ति के साहस, परिश्रम और आत्मबल का प्रतीक है. यह भाव जातक के जीवन में…

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कुण्डली के चतुर्थ भाव में छिपा है हृदय, सुख, और भावनाओं का रहस्य: जानें जीवन के दूसरे चरण और गृहस्थी के सुख का गूढ़ ज्ञान

Shashishekhar Tripathi  ज्योतिषशास्त्र में चतुर्थ भाव को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, क्योंकि यह भाव जातक की भावनाओं, कामनाओं और गृहस्थी के सुखों का प्रतीक है. इस भाव से व्यक्ति…

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पंचम भाव: विचारशक्ति, संतान-सुख, भाग्य की चमक और जीवन की मानसिक चेतना का केंद्र

Shashishekhar Tripathi  पंचम भाव को ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व दिया जाता है क्योंकि यह भाव विचारशक्ति, ज्ञान, संतान, और व्यक्ति के जीवन की सफलता का प्रतीक है. जिस प्रकार…

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कुण्डली के षष्ठ भाव से जानें शत्रुओं, कठिनाइयों और स्वास्थ्य का गूढ़ रहस्य: शुक्र और राहु के प्रभाव से समझें जातक के जीवन की दिशा

Shashishekhar Tripathi  ज्योतिषशास्त्र में षष्ठ भाव को शत्रुभाव या रोग भाव कहा जाता है, जो व्यक्ति की कठिनाइयों, शत्रुताओं और स्वास्थ्य से जुड़ा होता है. यह भाव जातक के जीवन…

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