Shri Bhaktamal : भक्तमाल ग्रंथ में श्री हरिध्यान निष्ठ भक्तों की कड़ी में अंतिम कथा यज्ञ पत्नियों की लिखी गयी है। कथा के अनुसार द्वापर युग में एक बार जंगल की एक शिला पर श्री कृष्ण और बलदाऊ दोनों भाई बैठे थे। पास में गौवें घास चरने और यमुना का जल पीने के बाद पेड़ों की छांव में आराम करने लगीं। उनके बछड़े भी मोर, बंदलों के आगे पीछे दौड़ कर खेल रहे थे। अचानक बलदाऊ ने अपने भाई से कहा, श्याम सुंदर ! हमें बहुत भूख लगी है, अभी तक दोपहर का कलेऊ नहीं आया है, कुछ इंतजाम करो।
श्याम सुंदर ने तुरंत सखाओ से कहा, देखो थोड़ी दूर पर धुआं उठ रहा है, मुझे बाबा ने बताया था कि मथुरा के ब्राह्मण यज्ञ करने आए हैं। उनसे जाकर कहो कि श्री कृष्ण और बलराम के लिए कुछ अन्न दें। सारे सखा वहां पहुंचे प्रणाम कर संदेश बताया लेकिन ब्राह्मणों ने उनकी तरफ देखा तक नहीं। उपेक्षा देख गोपबालक लौट आए और पूरी बात श्री कृष्ण को बतायी।
श्याम सुंदर ने कहा, पुरुष तो निर्दयी होते हैं लेकिन महिलाएं बहुत दयालु है। अबकी बार यज्ञ मंडप में न जाकर तुम लोग महिलाओं के लिए बने आवास पर जाओ, वहां से अवश्य ही कुछ मिलेगा। गोपबालक बोले, अब हम न जाएंगे, कहीं महिलाओं ने उन्हें पिटवा दिया तो क्या होगा। इस पर श्याम सुंदर ने फिर कहा, ब्राह्मण पत्नियों को तुम मेरा संदेश दो, वो निराश नहीं करेंगी। बार-बार कहने पर सखा राजी हुए और ब्राह्मणों की पत्नियों के पास पहुंच कर निवेदन किया।
महिलाएं उनका निवेदन सुनकर प्रसन्न हो गयीं और बोलीं, यह तो हमारा सौभाग्य है, कहां हैं नन्दनंदन। उन्होंने बनाए हुए ढेर सारे पकवान एक थाल में भर कर, गोपबालकों से कहा हमें वह स्थान दिखाओ जहां नन्दनंदन हैं। हम खुद जाएंगे। गोपकुमारों को आगे करके वे पीछे चलने लगीं। यज्ञ के लिए आए ब्राह्मणों ने देखा कि उनकी पत्नियां सोने के थालों में पकवान रख कर जा रही हैं तो आवाज देकर रोकने की कोशिश की। पीछे ब्राह्मणों को आता देख गोपकुमार तेजी से दौड़े तो महिलाएं भी दौड़ने लगीं। एक ब्राह्मण ने सबसे पीछे चल रही अपनी पत्नी को पकड़ लिया, तब तक अन्य महिलाएं थाल लेकर श्याम सुंदर के पास पहुंच चुकी थीं। उस महिलाएं ने अपने आंखें बंद कर लीं तो उसके हृदय में वंशीधर प्रकट हो गए और उन्हें प्रसन्न किया। इधर सोने के थाल में पकवान देख, श्याम सुंदर खड़े होकर बोले, आप लोगों का स्वागत है, मेरी बात पूरी करने के लिए आपने बहुत कष्ट सहा। अब आप सब लौट जाएं क्योंकि आपके पति लोग आपकी प्रतीक्षा कर रहे होंगे और बिना आपके उनका यज्ञ नहीं पूरा होगा।
उन ब्राह्मण पत्नियों का जवाब था, आप इतना निष्ठुर होकर न बोलिए श्याम सुंदर ! अब तो हम आपके शरणागत हैं और आपने प्रति शरणागत की रक्षा करने की प्रतिज्ञा की है। अब हम लोगों को भी आश्रय दें, इतना कहते ही सब रोने लगीं। वे सब लौटीं तो उनके पति इस बात से प्रसन्न थे कि वे तो भगवद् भक्त महिलाओं के पति हैं।