मंत्र का जप करने वाले की बुद्धि तीव्र होने के साथ ही मानसिक शांति मिलती है।

Dharm: गायत्री मंत्र जैसी शक्ति वाला गोस्वामीतुलसी रचित राम चरित का एक दोहा, 40 दिनों तक रोज 40 बार पाठ करने से जाग्रत होती मेधा शक्ति 

Dharm: हिंदू धर्म में मंत्रों का बहुत ही अधिक महत्व है। गायत्री मंत्र का नाम ही नहीं इसके महत्व के बारे में भी सभी ने सुना होगा कुछ लोग तो इस मंत्र का नियमित पाठ भी करते होंगे। इस मंत्र को “मंत्रों का मुकुट मणि” भी माना जाता है। इस लेख में हम जानेंगे गायत्री मंत्र के महत्व और इसी के ललित अनुवाद वाले गोस्वामी तुलसीदास रचित श्री रामचरित मानस के बालकांड के दोहे के बारे में। गायत्री मंत्र के समान शक्ति व महिमा वाले इस दोहे की पुष्टि एक पीठ के शंकराचार्य ने भी की है। मानस का प्रत्येक दोहा और चौपाई भी मंत्रों जैसी शक्ति वाले हैं। 

तो आइए सबसे पहले सनातन धर्म के उस मंत्र के बारे में जानते हैं जिसकी महत्ता के आधार पर उसे मंत्रों का मुकुटमणि बताया गया है। इस मंत्र को वेदों की माता की भी कहा गया है। मंत्र इस प्रकार है ….

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्”

ऋग्वेद में वर्णित यह मंत्र 24 अक्षरों से बना है, जो 24 शक्तियों और सिद्धियों का प्रतीक है। गायत्री मंत्र में कहा गया है कि हम उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को अपनी अंतरात्मा में धारण करें। वो परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करे।

इस मंत्र का जप करने वाले की बुद्धि तीव्र होने के साथ ही मानसिक शांति मिलती है और मानसिक तनाव में कमी आने के संग आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। मंत्र सभी प्रकार के पापों का नाश कर आत्मिक विकास करता है। जहां तक बौद्धिक विकास की बात है, इस मंत्र का नियमित जप करने से बुद्धि प्रखर और निर्णय लेने की क्षमता तेज होती है, जो विद्यार्थियों के लिए बहुत ही लाभकारी है। यह मंत्र क्रोध, तनाव और चिंता को कम करता है जिससे जप करने वाले को मानसिक स्थिरता और शांति मिलती है। बहुत से लोग नकारात्मकता से ग्रस्त होते हैं या उनके घर में नकारात्मक ऊर्जा होती है, ऐसे लोगों के घर में मंत्र का उच्चारण सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है जिससे उनके आत्म-विश्वास में वृद्धि होती है। इस मंत्र का जप करने से जीवन में सुख, समृद्धि और कार्यों में सफलता के साथ ही भक्तों को दिव्य सुरक्षा प्रदान करता है।  

अब जानते हैं श्री रामचरित मानस के बालकांड में मंगलाचरण के दोहे के बारे में। पहले दोहे को समझिए ….

“जनकसुता जग जननि जानकी । 

अतिसय प्रिय करुनानिधान की ⁠।⁠। 

ताके जुग पद कमल मनावउँ । 

जासु कृपाँ निरमल मति पावउँ ।⁠।” 

दोहे का अर्थ है राजा जनक की पुत्री, जगत् की माता और करुणानिधान श्री रामचन्द्रजी की प्रियतमा श्रीजानकी जी के दोनों चरण कमलों को मैं मानता हूँ, जिनकी कृपा से निर्मल बुद्धि पाऊं। इस दोहे में गोस्वामी तुलसीदास जी जगत जननी माता सीता जनकसुता की वंदना करते हुए उनसे निर्मल बुद्धि की कृपा मांग रहे हैं। 

पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस दोहे की महिमा बताते हुए एक वीडियो में कहा कि गायत्री मंत्र का गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी में ललित अनुवाद किया है इस दोहे में जगत जननी जनकसुता के माध्यम से गायत्री भगवती वासित हैं। जो व्यक्ति 40 दिनों तक 40 बार रोज इसका पाठ करता है तो उसकी मेधा शक्ति जाग्रत होती है।

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