दीपावली के दूसरे दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा की जाती है जिसे लोग अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं. भगवान श्री कृष्ण के साथ जुड़ी एक घटना की याद में यह पर्व द्वापर युग से मनाया जा रहा. इस पर्व के माध्यम से जहां हम प्रकृति की पूजा करते हैं वहीं गोधन अर्थात गाय का पूजन भी किया जाता है. मान्यता के अनुसार गाय गंगा नदी के समान पवित्र है और इसके शरीर के भीतर सभी देवी देवताओं का वास है.
इस प्रकार से करें पूजा
इस दिन घर के मुख्य द्वार पर गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है. कुछ घरों के आंगन के मध्य में गाय के गोबर से श्रीकृष्ण द्वारा गोकुल वासियों के सहयोग से गोवर्धन पर्वत उठाने के दृश्य को चित्रित किया जाता है. पुराणों के अनुसार गाय के गोबर में लक्ष्मी का निवास होता है, सुख समृद्धि के लिए इस पूजा को करने की परम्परा है. सायंकाल गोधूलि वेला में उसी गोबर को समेट के पर्वत का आकृति बनाते हुए बीच में एक दीया जला कर सात बार परिक्रमा की जाती है.
