छठ पूजा में यूं तो बहुत से लोकगीत गाए जाते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में छठ मैया की पूजा करने की महत्ता बताने वाली कथा भी सुनी और सुनाई जाती है. मान्यता है कि प्रातः काल उदित सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण करने के पहले इन कहानियों को सुनने सुनाने से छठ मैया की कृपा प्राप्त होती है.
जब छठ मैया स्वयं ही वेश बदल कर पहुंचीं
पहली कथा के अनुसार एक परिवार में दो पुत्र थे और दोनों का ही विवाह हो गया तो अगल-बगल के घर में अपनी पत्नियों के साथ रहने लगे. बड़े भाई की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी थी जबकि छोटे भाई को जीवन यापन करना भी कठिन हो रहा था. छठ पूजा के अवसर पर दोनों की पत्नियों ने व्रत रखा. रात में छठ मैया वेश बदल कर देवरानी के घर में पहुंचीं और उनसे आग्रह किया कि भूख लगी है कुछ खाने के लिए दो. देवरानी ने कहा कि बहुत कुछ तो नहीं, बस साग रोटी ही बनाया है तो उन्होंने खाने के लिए उसी की मांग कर दी. वेश बदल कर पहुंचीं छठ मैया ने सूखी रोटी और साग भी बड़े चाव से खाया, उन्होंने कुछ देर विश्राम किया फिर उठ कर बोलीं की मुझे तो शौच लगी है कहा करू. इस पर देवरानी ने कहा कि पूरा घर पड़ा है जहां चाहो कर दो. घर में इधर-उधर मल त्याग के बाद बोलीं इसे कैसे धोएं पोछें तो उन्होंने कहा कि मेरे कपड़ों और माथे पर पोछ लो. ऐसा ही करने के बाद वह घर से चली गयीं. देवरानी भी अपने घर वालों को साथ सो गयी और सुबह उठीं तो देखा जहां जहां पर मल किया गया था वह सोना हो गया. यहां तक कि उनकी धोती और माथा भी सोने का हो गया. यह बात जंगल में आग की तरह फैल गयी तो जेठानी देवरानी को अपने घर बुला कर पूछा तो उसने पूरी बात बता दी कि मेरे घर एक महिला आई थीं. दूसरे दिन जेठानी के घर वही महिला पहुंचीं, जेठानी ने अपनी हैसियत के हिसाब से पकवान बनाए थे किंतु लालच के चलते उनके द्वारा खाने के लिए कुछ मांगने पर साग रोटी ही पकड़ा दी. आगे भी वही घटनाक्रम हुआ और महिला सुबह होने के पहले ही उसके घर से चली गयी. उनके जाते ही घर में भयंकर दुर्गंध आने लगी. इस तरह छठ मैया ने संदेश दिया कि जो जितनी भी आस्था और श्रद्धा से मेरी पूजा करता है, मैं उसे उसी के अनुसार फल देती हूं.
