मानस मंथन : जानिए राम चरित मानस की रचना सबसे पहले किसने की, उन्होंने इस कथा को किसे सुनाया और जनमानस तक कैसे पहुंची

16 वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा लिखी गई काव्य रचना रामचरितमानस अब वैश्विक धार्मिक ग्रंथ बन चुका है और भारत की ही नहीं विश्व की न जाने कितनी भाषाओं…

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मां काली की पूजा क्यों है जरूरी, दीपावली में रात निशीथकाल का है बहुत महत्व, इसे व्यर्थ न होने दें, जानिए गहरी बात…

इस बार का दीपावली पर्व आपकी श्री वृद्धि के साथ ही ध्येय सिद्धि की पूर्ति भी करे और आप लोगों पर देवों में प्रथम पूज्य गणेश जी, लक्ष्मी जी एवं…

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रंग बिरंगी रोशनी से करे अपना घर रौशन, दरवाजे पर लगाएं वंदनवार, इन बातों का रखा ध्यान तो मिलेगे शुभ फल

दीपावली के मौके पर सबसे अधिक ध्यान घर की सफाई और रंग रोगन पर दिया जाता है. अच्छी बात है, यह काम करना ही चाहिए क्योंकि गंदगी दरिद्रता का प्रतीक…

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दशानन का अनोखा मंदिर, जिसके पट खुलते है साल में एक बार, साथ में रावण के इष्ट का ऐसा शिवालय.. जहां द्वार से बड़ा है शिवलिंग का आकार

दशहरा का पर्व अन्याय पर न्याय की विजय के रूप में मनाया जाता है क्य़ोंकि इसी दिन प्रभु श्री राम ने लंकाधिपति रावण का अंत किया था, प्रतीक रूप में…

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एक ऐसा मंदिर जहां लव कुश का मुंडन और कर्णछेदन हुआ, दर्शन करने से पूरी होतीं मनोकामना

देवी माता के इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि बच्चों का मुंडन और कर्णछेदन यहां कराने से बच्चा जीवन में बुद्धिमान, मेधावी और यशस्वी बनता है. यह भी…

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शक्तिपीठः जानें माता सती के अंगों को क्यों और किसने किया टुकड़ों में विभक्त, क्या है दर्शन का महत्व

नवरात्र में शक्ति की उपासना और देवी मंदिर का दर्शन करना पुण्य कार्य माना जाता है. इनमें भी यदि शक्तिपीठ के दर्शन करने का अवसर प्राप्त हो जाए तो समझिए…

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आज भी इस क्षेत्र की असुरों से रक्षा करती हैं मां चामुण्डा देवी, जाने इसके पीछे की पूरी कहानी

देवी के इस स्वरूप ने पौराणिक काल में दो महाबलशाली असुरों का वध किया था. इस मंदिर का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण के देवी महात्म्य में भी है और आदि गुरु…

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फल, मिठाई से नहीं हरी सब्जियों के भोग से प्रसन्न होती है बुद्धा देवी… जाने कहां है यह अद्भुत अलौकिक मंदिर

प्रथम देव गणपति को उनका प्रिय भोग लड्डू लगाया जाता है तो देवियों को उनके स्वरूप के आधार पर सफेद बर्फी, पेड़ा  मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है. किंतु…

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राक्षस तो बहुत हुए, फिर विजयादशमी पर ही क्यों फूंका जाता है रावण का पुतला.. जानें इसके पीछे का कारण

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है. इस दिन गांव कस्बों से लेकर महानगरों ही नहीं विदेशों में भी धूमधाम से रामलीला…

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महान ऋषि की संतान होने के बाद भी रावण क्यों बना राक्षस, नहीं पहचान सका शिव जी के अवतार को

विजयादशमी अर्थात दशहरा का पर्व लंकाधिपति रावण पर प्रभु श्री राम की विजय के उल्लास में मनाया जाता है और इस अवसर पर अन्याय के प्रतीक राक्षस राज रावण का…

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