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हिडिम्बा से घटोत्कच का जन्म होने के बाद भीम वापस अपने परिवार में आ गए और युधिष्ठिर आदि पांडव अपनी मां के साथ एकचक्रा नगरी में रहने लगे।

Dharma : जानिए कुन्ती ने जिस ब्राह्मण देव के घर पुत्रों सहित शरण पाई उसे उसकी रक्षा का आश्वासन क्यों दिया

Dharma : हिडिम्बा से घटोत्कच का जन्म होने के बाद भीम वापस अपने परिवार में आ गए और युधिष्ठिर आदि पांडव अपनी मां के साथ एकचक्रा नगरी में रहने लगे।…

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मदालसा एक ऐसी विद्वान, विदुषी महिला थीं, जिन्हें अपने पुत्रों का ही नहीं पति का भी उद्धार किया।

Shri Bhaktamal : श्री मदालसा जी की कथा

Shri Bhaktamal : मदालसा एक ऐसी विद्वान, विदुषी महिला थीं, जिन्हें अपने पुत्रों का ही नहीं पति का भी उद्धार किया। पहले वे गंधर्वराज विश्वावसु की पुत्री थीं फिर नागराज…

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Read more about the article Dharma :  युधिष्ठिर की अनुमति मिलते ही राक्षसी हिडिम्बा के विवाह का प्रस्ताव रखने पर भीम ने रखी यह शर्त 
#युधिष्ठिर की अनुमति मिलते ही राक्षसी हिडिम्बा के विवाह का प्रस्ताव रखने पर भीम ने रखी यह शर्त

Dharma :  युधिष्ठिर की अनुमति मिलते ही राक्षसी हिडिम्बा के विवाह का प्रस्ताव रखने पर भीम ने रखी यह शर्त 

Dharma :  राक्षसराज हिडिम्ब को मारने के बाद भीम अपनी माता और भाइयों संग वारणावत के जंगलों में आगे बढ़े तो देखा राक्षसी हिडिम्बा भी उनके पीछे आ रही है।…

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स्वाम्भुव मनु और उनकी पत्नी शतरूपा से ही मानव सृष्टि का आरंभ हुआ।

Shri Bhaktamal : श्री शतरूपा जी की कथा

Shri Bhaktamal : स्वाम्भुव मनु और उनकी पत्नी शतरूपा से ही मानव सृष्टि का आरंभ हुआ। ब्रह्मा जी के शरीर के दाहिने भाग से मनु और बाएं भाग से शतरूपा…

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Dharma :  भीमसेन ने राक्षसी हिडिम्बा से जन्मे अपने पुत्र का नाम “घटोत्कच” क्यों रखा, उसके जन्म में इंद्र की क्या भूमिका थी

Dharma : युधिष्ठिर और माता कुन्ती ने जैसे ही हिडिम्बा के साथ भीमसेन को विवाह कर पुत्र को जन्म देने की अनुमति दी, वह भीम को लेकर आकाश मार्ग से…

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महाराज पृथु के वंश में बहर्षिद नाम के राजा हुए जो बहुत ही धर्मात्मा थे।

Shri Bhaktamal : श्री प्रचेतागणों की कथा

Shri Bhaktamal :  महाराज पृथु के वंश में बहर्षिद नाम के राजा हुए जो बहुत ही धर्मात्मा थे। उन्होंने एक के बाद एक यज्ञ कराए जिससे पूरा भूमंडल यज्ञमंडप सा…

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Read more about the article Dharma :  जानिए वारणावत के घने जंगल में भीम ने किस राक्षसराज को जमीन पर पटक कर मारा 
भीम ने हिडिम्ब राक्षस को उठा कर जमीन पर पटक दिया, जिससे उसके प्राण निकल गए।

Dharma :  जानिए वारणावत के घने जंगल में भीम ने किस राक्षसराज को जमीन पर पटक कर मारा 

Dharma :  जंगल में राक्षसराज हिडिम्ब ने भेजा तो अपनी बहन हिडिम्बा को था कि पांडवों को मार कर ले आओ तो उन्हें भोजन के रूप में इस्तेमाल किया जाए…

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Read more about the article Dharma : जंगल में विश्राम कर रहे पांडवों को मारने के लिए जिसे भेजा गया उसका मन क्यों बदल गया, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर  
शेर के समान भीमसेन को देख कर हिडिम्बा का मन बदल गया और वह उनके रूप रंग पर मोहित हो गयी।

Dharma : जंगल में विश्राम कर रहे पांडवों को मारने के लिए जिसे भेजा गया उसका मन क्यों बदल गया, जानने के लिए पढ़े पूरी खबर  

Dharma : लाक्षागृह से बचकर निकलने के बाद गंगा पार कर पांडव घने जंगल में चलते-चलते थक गए और माता कुन्ती ने पानी की मांग की तो भीम ने सभी…

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नैमिषारण्य में जो 88 हजार ब्रह्मवादी ऋषि रहते थे, उनके प्रधान थे श्री शौनक जी। भृगुवंशी शुनक जी के पुत्र होने के नाते उनका नाम शौनक पड़ा।

Shri Bhaktamal : श्री शौनक जी की कथा

Shri Bhaktamal : नैमिषारण्य में जो 88 हजार ब्रह्मवादी ऋषि रहते थे, उनके प्रधान थे श्री शौनक जी। भृगुवंशी शुनक जी के पुत्र होने के नाते उनका नाम शौनक पड़ा।…

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Read more about the article Dharma : लाक्षागृह से गोपनीय तरीके से निकल गए और छह शवों को देख कौरवों ने कर दिया अंतिम संस्कार 
#लाक्षागृह से बच कर निकलते हुए पांडव माता कुन्ती के साथ गंगातट पर पहुंचे तो उन्हें विदुर जी का भेजा हुए व्यक्ति मिला।

Dharma : लाक्षागृह से गोपनीय तरीके से निकल गए और छह शवों को देख कौरवों ने कर दिया अंतिम संस्कार 

Dharma : लाक्षागृह से बच कर निकलते हुए पांडव माता कुन्ती के साथ गंगातट पर पहुंचे तो उन्हें विदुर जी का भेजा हुए व्यक्ति मिला। उसने कहा नौका तैयार है, उनका…

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