महर्षि कण्व के आश्रम में रहने वाली शकुंतला के गर्भ से एक ऐसे तेजस्वी पुत्र का जन्म हुआ कि आकाश से फूलों की वर्षा होने लगी और देवगण दुदुंभि बजाने लगे तथा अप्सराएं प्रसन्नता में गीत गाने लगीं. बालक जंगल में भी वन्य पशुओं के बीच रह कर बड़ा होने लगा तो कई बार शेर, बाघ जैसे हिंसक पशुओं को पकड़ कर ले आता और एक पेड़ से बांध कर अपनी मां को दिखाता. कभी कुछ पशुओं के साथ खेलता तो कभी उनकी गलती पर जोर की डांट लगाता. वह उनके साथ ऐसे घुल मिल जाता मानों वह सब पशु न होकर उसके टैडी बियर हैं और खेल कर आनंद लेता रहता. लोग देख कर दंग रह जाते कि एक छोटा सा बालक इतने हिंसक जानवरों के साथ खेलता और डांटता है.
