द्रौपदी के साथ जैसे ही वो लोग घर पहुंचे, पीछे से श्री कृष्ण और बड़े भाई बलराम भी पहुंच गए।

Dharma : भीमसेन और अर्जुन के साथ द्रौपदी के जाते ही श्रीकृष्ण और बलराम भी घर पहुंचे, जानिए कौन कर रहा था उनका पीछा

Dharma : स्वयंवर में मौजूद श्री कृष्ण ने अर्जुन और भीमसेन को पहचान लिया था इसीलिए द्रौपदी के साथ जैसे ही वो लोग घर पहुंचे, पीछे से श्री कृष्ण और बड़े भाई बलराम भी पहुंच गए। श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर और कुन्ती बुआ के चरण छुए। युधिष्ठिर ने उनकी कुशलक्षेम पूछने के साथ ही प्रश्न किया, यहां तो हम लोग छिप कर रह रहे हैं, आपने किस तरह पहचान लिया। श्री कृष्ण बोले, महाराज ! क्या लोग छिपी हुई आग को नहीं ढूंढ लेते, आज भीमसेन और अर्जुन ने जिस पराक्रम का परिचय दिया है, वो पांडवों के अतिरिक्त अन्य कोई कर ही नहीं सकता है। 

संक्षिप्त बात कर श्री कृष्ण और बलराम चल दिए

श्री कृष्ण ने आगे कहा, यह बड़े सौभाग्य की बात है कि दुर्योधन और उसके मंत्री पुरोचन की इच्छा पूरी न हो सकी और आप लोग सकुशल लाक्षाभवन की आग से बचकर निकल आए। आपके संकल्प पूरे हों और निश्चय सार्थक हों। अब हम लोग अधिक देर तक यहां नहीं रुकेंगे अन्यथा लोगों को पता लग जाएगा इसलिए हम लोगों को अपने स्थान पर जाने की अनुमति दें। उनकी आज्ञा प्राप्त करते ही श्री कृष्ण और बलराम अपने डेरे पर लौट आए। 

धृष्टघुम्न ने गुपचुप देखी हर गतिविधि

जिस समय भीमसेन और अर्जुन द्रौपदी को साथ लेकर कुम्हार के घर जा रहे थे, धृष्टघुम्न छिप कर उनका पीछा कर रहे थे। उसने हर तरफ अपने कर्मचारी नियुक्त किए और खुद पांडवों की एक-एक गतिविधि पूरी गंभीरता से देखता रहा। उसने देखा चारो भाइयों ने भिक्षा लाकर अपने बड़े भाई युधिष्ठिर के पास रख दी। कुन्ती ने द्रौपदी से कहा, कल्याणि ! पहले तुम इसमें से देवताओं का भाग निकालो, ब्राह्मणों को भिक्षा दो और आश्रितों को बांटो। बचे हुए अन्न का आधा भाग भीमसेन को दे दो और बचे हुए आधे के छह भाग कर दो जिन्हें हम लोग खा लें। द्रौपदी ने सास की आज्ञा पर कोई शंका किए बिना प्रसन्नता से उसका पालन किया। भोजन के बाद सबके लिए कुशा का आसन बिछाया गया और उसके ऊपर उन लोगों ने अपने-अपने मृगचर्म बिछाए। दक्षिण दिशा की ओर सिरहाना कर सब लेट गए तो सिर की ओर माता कुन्ती और पैरों की ओर द्रौपदी लेट गयीं। रात में सोते समय वे लोग रथ, हाथी, घोड़े, तलवार और गदा आदि की इस तरह बातें कर रहे थे, मानों किसी सेना के अधिकारी हों।     

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